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मध्यप्रदेश

सुलियरी और धिरौली कोल माइंस: विस्थापितों के लिए समाधान की कदम तेजी से, सरकार की नई पहल से सांभाला जा रहा है परिस्थिति”

सुलियरी और धिरौली कोल माइंस के प्रभावित लोगों ने कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अपनी समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने व्यक्त किया कि उन्हें संपूर्ण सुविधा नहीं मिल रही है, इसलिए उन्होंने जिला कलेक्टर से अपनी मांगें प्रस्तुत की हैं।

सुलियरी कोल माइंस की भूमि पर स्थित छुटी हुई चल और अचल संपत्तियों के लिए मौजा भुगतान की मांग की गई है। विस्थापित लोगों को S9 के बैंक चेक देकर उनकी सहायता की जा रही है और उन्हें प्रतिवर्ष 12% ब्याज के साथ अवार्ड भी दिया जा रहा है।

जिन लोगों का नाम विस्थापन सूची में छूट गया है, उनका नाम तत्काल जोड़कर उन्हें भी विस्थापन किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को परियोजना से प्राप्त कार्ड भी दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिले।

परियोजना के अंतर्गत कृषि योग्य भूमि कंपनी द्वारा अर्जित कर ली गई है और उन्हें पुनर्वास नीति के तहत विशेष पैकेज दिया जा रहा है। विस्थापित परिवारों को मौज और तेंदूपत्ता का पुनर्वास भी निश्चित किया जा रहा है।

परियोजना के कार्य श्रमिकों को उच्च मानक हेतु पावर वेजेस दिए जा रहे हैं और सभी श्रमिकों को उनके काम के अनुसार मासिक वेतन दिया जा रहा है। विस्थापित परिवारों को नौकरी भी प्रदान की जा रही है।

सभी विस्थापितों को आज दिनांक की कृषि मजदूरी दर से अधिक बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। जो विस्थापित परिवार नौकरी नहीं करना चाहते हैं, उन्हें एक मुक्त 10 लाख रुपए भी दिए जा रहे हैं।

डोगरी से खनुआ तक सिंगल रोड की व्यवस्था की मांग को भी ध्यान में रखा जा रहा है, ताकि दुर्घटनाओं का खतरा कम हो। ग्रामीण रोडों से कोयला परिवहन को बंद किया जा सकता है, जब तक कंपनी न खुद रोड निर्माण कराए।

यहां तक कि अन्य मांगों की पूर्ति न होने पर विस्थापित परिवार डिस्पैच गेट को बंद करके धरने भी बैठ सकते ह

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