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राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार NDA का नेता चुना गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रवार को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की संसदीय दल का लगातार तीसरी बार नेता चुना गया। यह महत्वपूर्ण बैठक पुराने संसद (संविधान सदन) के सेंट्रल हॉल में आयोजित की गई, जहां सुबह 11 बजे से विभिन्न दलों के नेताओं ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा, “मुझे नया दायित्व देने के लिए आभार। मेरा एक ही लक्ष्य है- भारत माता और देश का विकास।”

इस महत्वपूर्ण बैठक में NDA के सभी 293 सांसद, राज्यसभा सांसद और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री तथा डिप्टी मुख्यमंत्री उपस्थित थे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्वागत भाषण देकर सभा की शुरुआत की। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे अमित शाह और नितिन गडकरी ने समर्थन और अनुमोदन किया। जेडीएस अध्यक्ष कुमारस्वामी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “हम सभी को बधाई देते हैं। मैंने चुनाव प्रचार के दौरान देखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी आराम नहीं किया। उन्होंने उसी भावना के साथ शुरुआत की और उसी भावना के साथ खत्म किया। आंध्र प्रदेश में हमने 3 जनसभाएं और 1 बड़ी रैली की, जिसने चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

बिहार के मुख्यमंत्री और JDU प्रमुख नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नाम का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं मोदीजी के नाम का समर्थन करता हूं। यह बहुत खुशी की बात है कि 10 साल से प्रधानमंत्री हैं, और अब फिर से प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इन्होंने देश की सेवा की है और जो कुछ भी बचा है, उसे अब पूरा कर देंगे।”

सूत्रों के मुताबिक, संसद के सेंट्रल हॉल में NDA की मीटिंग खत्म होने के बाद गठबंधन के नेता आज ही सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। मोदी 9 जून को शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की तीसरी बार शपथ ले सकते हैं। खबर है कि मोदी के साथ पूरा मंत्रिमंडल शपथ ले सकता है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के आंकड़े (272) से 32 सीटें कम हैं। हालांकि, NDA ने 293 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। NDA में भाजपा के अलावा 14 सहयोगी दलों के 53 सांसद हैं। गठबंधन में चंद्रबाबू नायडू की TDP 16 सीटों के साथ दूसरी और नीतीश कुमार की JDU 12 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है।

महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व

मोदी सरकार के नए कैबिनेट में महाराष्ट्र के 5-6 चेहरों को शामिल करने की चर्चा है। सभी पार्टियों के लिए 5 सांसद पर एक कैबिनेट मंत्री पद का फॉर्मूला तय हुआ है। नितिन गडकरी, नारायण राणे और पीयूष गोयल के नाम मंत्री पद के रेस में आगे हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री का पद मांग रही है। एनसीपी (अजित गुट) भी एक कैबिनेट पद की मांग कर सकती है। मराठाओं की नाराजगी कम करने के लिए एक मंत्री मराठा समुदाय से बनाया जा सकता है।

महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में भाजपा ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है, इस हिसाब से भाजपा के दो सांसदों को मंत्री बनाया जा सकता है। सहयोगी पार्टी शिवसेना (शिंदे) को 7 सीटें और एनसीपी (अजित) को 1 सीट मिली है। इन्हें 1-1 मंत्री पद मिलने की संभावना है।

भाजपा का JDU-TDP से तालमेल

भाजपा के पास बहुमत नहीं है। गठबंधन की सरकार में सहयोगी पार्टियां भाजपा के पिछले फैसलों और कई रिफॉर्म्स को लागू करने में रोड़ा बन सकती हैं। JDU और TDP के अपने-अपने हित हैं और अतीत में इनके भाजपा के साथ उतार-चढ़ाव भरे रिश्ते रहे हैं। ऐसे में भाजपा को 10 सालों से जारी सुधार के अहम कदमों, प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डालने पड़ सकते हैं।

प्रमुख मुद्दे

एक देश-एक चुनाव : TDP इसके विरोध में है, जबकि JDU समर्थन में है। विपक्ष भी मजबूत हुआ है।
परिसीमन : महिला आरक्षण का वादा परिसीमन पर लागू होगा, TDP विरोध में है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड : भाजपा इसे लागू करने को तैयार थी, अब प्राथमिकताओं से हट सकती है।
काशी-मथुरा : राम मंदिर का फायदा न मिलने से इन पर दावे की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
विनिवेश : JDU सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश के विरोध में है। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की
मांग भी कर सकती है।
मुस्लिम आरक्षण : TDP और भाजपा के बीच टकराव का मुद्दा हो सकता है।

इन चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA के सभी घटक दल भारत के विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Janvi Express News

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