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देश

लोकसभा चुनाव: EVM की काउंटिंग प्रक्रिया

भारत के नागरिक इंतजार में हैं, कल सुबह 8 बजे से EVM के पिटारा खुल जाएगा और उसकी काउंटिंग शुरू होगी। यह प्रक्रिया संविधानिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें देश के नागरिकों के वोटों का आंकलन किया जाता है और सरकार चुनी जाती है।

कांग्रेस नेता अजय माकन ने सोशल मीडिया पर अपने विचारों को बयां किया, जिसमें उन्होंने आवाज उठाई कि “उम्मीदवारों के एजेंट्स को ARO के टेबल पर पहली बार अनुमति नहीं दी जाएगी।” लेकिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस धारणा का खंडन किया, कहते हुए, “RO और ARO की टेबल पर उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंटों को जाने की अनुमति है।”

यहां एक झलक:

1. वोटों की गिनती : वोटों की गिनती का जिम्मा रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को होता है, जो लोकसभा क्षेत्र में चुनाव कराता है। उन्हें सहायक के रूप में अधिकारी भी मदद करते हैं।

2. मतगणना का समय : मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होती है और कुछ घंटों तक चलती है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण और सावधानीपूर्ण प्रक्रिया है।

3. सरकारी प्रोटोकॉल :  मतगणना के दौरान गुप्त रहने का प्रोटोकॉल होता है और सभी जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है। इसे पूर्णत: संविधानिक तरीके से संचालित किया जाता है।

4. एजेंटों की संख्या : हर उम्मीदवार की ओर से हर टेबल पर एक एजेंट होता है। इस प्रक्रिया में सभी को तरह-तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है।

काउंटिंग के 45 दिनों तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को उसी स्टोर रूम में रखा जाता है, और उसके बाद इसे बड़े स्टोर रूम में स्थानांतरित किया जाता है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, इन EVM में आने वाले 6 महीनों तक डेटा को सुरक्षित रखा जाता है, और इन्हें किसी अन्य चुनाव के लिए उपयोग में नहीं लाया जाता है।

इसके बाद, इनके डेटा को सुरक्षित तरीके से डंप करके EVM को आगामी चुनावों के लिए तैयार किया जाता है।

इस प्रक्रिया में नागरिकों का सहभागिता बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमारे लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे हमें समय-समय पर सुनिश्चित करना चाहिए।

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